आधुनिक आवर्त सारणी विशेषता

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आधुनिक आवर्त सारणी विशेषता

आधुनिक आवर्त सारणी विशेषता 

  1. संयोजी इलेक्ट्रॉन

किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर संयोजी इलेक्टॉमी संख्या क्रमशः 1 से 8 तक बढ़ती है। प्रथम आवर्त में यह वटि सिर्फ 1 से 2 तक होती है। तृतीय आवर्त में होनेवाली वटि को सारणी 5.19 में दिखाया गया है। .. सारणी 5.19 आवर्त 3 में संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या

में परिवर्तन आवर्त सारणी से स्पष्ट है कि इन तत्त्वों के परमाणुओं में संयोजी शेलों की संख्या समान है। अतः, समान शेलों की संख्या वाले तत्त्वों को आवर्त सारणी के एक ही आवर्त के अंतर्गत रखा गया है।

  1. संयोजकता ।

द्वितीय और तृतीय आवर्तों में बाएँ से दाएँ जाने पर हाइड्रोजन के सापेक्ष संयोजकता 1 से 4 तक बढ़ती है, फिर 4 से क्रमशः घटकर 1 हो जाती है।

 

 

  1. परमाणु का आकार

किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर तत्त्वों के परमाणु आकार घटते जाते

किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु संख्या बढ़ती है। अतः, परमाणु में प्रोटॉनों और इलेक्ट्रॉनों की संख्याएँ बढ़ती जाती हैं। अतिरिक्त आनेवाले इलेक्ट्रॉन एक ही शेल में प्रवेश करते हैं। अतः, नाभिक में धन आवेश बढ़ने से नाभिक और बाह्य इलेक्ट्रॉनों के बीच आकर्षण बढ़ जाने से बाह्य इलेक्ट्रॉन शेल नाभिक की ओर खिंच जाते हैं। फलतः, परमाणु का आकार घटते जाता है। .

. 4. धातुई गुण

किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर तत्त्वों के धातुई गुण घटते जाते हैं। अतः, विशिष्ट धातुएँ आवर्त सारणी में एकदम बायीं ओर और विशिष्ट अधातुएँ एकदम दायीं ओर स्थित हैं। उदाहरण के लिए, तृतीय आवर्त के तत्त्वों को लें। . ..

  1. आयनन ऊर्जा

किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर तत्त्वों की आयनन ऊर्जा क्रमशः बढ़ती जाती है। इसका कारण परमाणु के आकार का घटते जाना है। फलतः, तत्त्व का विद्युतधनात्मक गुण कम होते जाता है और विद्युतऋणात्मक गुण बढ़ते जाता है।

  1. विद्युतऋणात्मकता

किसी आवर्त में बाएँ से. दाएँ जाने पर तत्त्व की विद्युतऋणात्मकता बढ़ती जाती है। इसका कारण यह है कि बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु का आकार घटता है जिससे प्रवेश करनेवाले अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन आसानी से नाभिक की ओर आकर्षित हो जाते हैं।

  1. ऑक्साइडों के गुण

किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर तत्त्वों के ऑक्साइड की प्रकृति प्रबल भास्मिक से क्रमशः घटकर प्रबल अम्लीय हो जाती है।

 

मेंडलीव की आवर्त सारणी से आधुनिक आवर्त सारणी की श्रेष्ठता

मेंडलीव की आवर्त सारणी की तुलना में आधुनिक आवर्त सारणी अधिक उपयोगी है।

  1. आधुनिक आवर्त सारणी तत्त्वों की परमाणु संख्या पर आधारित है, जबकि मेंडलीव की आवर्त सारणी तत्त्वों के परमाणु द्रव्यमान पर आधारित है। परमाणु द्रव्यमान की तुलना में परमाणु संख्या तत्त्व का अधिक मौलिक गुण है।
  2. आधुनिक आवर्त सारणी में तत्त्वों को उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के अनुसार सजाया गया है। समान इलेक्ट्रॉनिक विन्यास वाले तत्त्व एक ही वर्ग के अंतर्गत रखे गए हैं। – इसीलिए किसी वर्ग के सभी तत्त्वों के गुण समान होते हैं। र विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक विन्यास वाले तत्त्व भिन्न-भिन्न

गुणवाले होते हैं। अतः, इन्हें भिन्न-भिन्न वर्गों में रखा गया हो

  1. आधुनिक आवर्त सारणी की सहायता से तत्त्वों के गुणों की

रासायनिक आवर्तता की व्याख्या संतोषजनक रूप से की जा सकती है। तत्त्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास की आवर्तता के कारण उनके गुणों में भी आवर्तता उत्पन्न होती है। चूँकि तत्त्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास की पुनरावृत्ति निश्चित अंतरालों पर होती है, अतः उनके गुणों में भी ऐसी ही पुनरावृत्ति होती है। माना

 

  1. मेंडलीव की आवर्त सारणी की कई विसंगतियाँ आधुनिक आवर्त सारणी में दूर हो गई हैं।
  2. आधुनिक आवर्त सारणी में सामान्य तत्त्व, संक्रमण तत्त्व

और उत्कृष्ट गैसें स्पष्ट रूप से अलग-अलग कर दी गई हैं। धातु और अधातु तत्त्व भी अलग-अलग हैं। किंतु, मेंडलीव की आवर्त सारणी में तत्त्वों के विभिन्न प्रकार अलग-अलग नहीं हैं।

  1. आधुनिक आवर्त सारणी में मेंडलीव की सारणी के उपवर्ग

A और B बिल्कुल अलग-अलग कर दिए गए हैं और वर्गों की संख्याओं को 1, 2, 3, 4, …, 18 तक अंकों में व्यक्त किया गया है।

  1. आधुनिक सारणी को याद रखना अपेक्षाकृत आसान है।

आधुनिक आवर्त सारणी के दोष

यद्यपि आधुनिक आवर्त सारणी में मेंडलीव की आवर्त सारणी के अधिकांश दोष दूर कर दिए गए हैं, फिर भी इसमें निम्नलिखित दोष रह गए हैं

  1. हाइड्रोजन का स्थान- इस आवर्त सारणी में भी मेंडलीव की सारणी की भाँति हाइड्रोजन का स्थान अनिर्णित है।
  2. हीलियम का स्थान- इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के अनुसार हीलियम का स्थान वर्ग 2 में क्षारीय मृदा धातुओं के साथ होना चाहिए था, किंतु इसे उत्कृष्ट गैसों के साथ वर्ग 18 में रख दिया गया है।

 

 

किसी परमाणु के गुणों का अनुमान

 बावर्त सारणी की सहायता से किसी तत्त्व के परमाणु के गुणों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। आवर्त सारणी में तत्त्व का स्थान जानकर निम्नलिखित सूचनाएँ प्राप्त की जाती हैं।

  1. वर्ग संख्या-तत्त्व की वर्ग संख्या से तत्त्व के परमाणु की बाह्यतम कक्षा में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों (संयोजी इलेक्ट्रॉन) की संख्या ज्ञात हो जाती है।
  2. आवर्त संख्या-आवर्त सारणी में तत्त्व की आवर्त संख्या से उस तत्त्व के परमाणु में विद्यमान कुल शेलों की संख्या ज्ञात हो जाती है।
  3. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास-संयोजी इलेक्ट्रॉनों और परमाणु के शेलों की संख्या से उस परमाणु इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था लिखी जा सकती है।
  4. परमाणु संख्या-तत्त्व के परमाणु में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या तत्त्व की परमाणु संख्या होती है।
  5. धातुई और अधातुई गुण-तत्त्व के संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या से यह अनुमान लगाना आसान हो जाता है कि उस तत्त्व में धातुई गुण है या अधातुई गुण। यदि तत्त्व के परमाणु में 1, 2 या 3 संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं तो वह तत्त्व धातु होगा इसके विपरीत, परमाणु में 4 या अधिक संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं तो वह तत्त्व अधातु होगा।
  6. परमाणु का आकार-तत्त्व के परमाणु में शेलों की कुल संख्या से उस परमाणु के आकार के संबंध में कुछ जानकारी प्राप्त हो जाती है।
  7. तत्त्व की क्रियाशीलता-आवर्त सारणी में तत्त्व के स्थान से उस तत्त्व की क्रियाशीलता की कुछ जानकारी प्राप्त हो जाती

 

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