मेंडलीव का आवर्त नियम (Mendeleev’s periodic law)

मेंडलीव का आवर्त नियम (Mendeleev’s periodic law) ,

science 2227606 1920

 

न्यूलैंड्स के अष्टक नियम से प्रेरित होकर 1869 में रूसी रसायनज्ञ दमित्री मेंडलीव (Dmitri Mendeleev) ने तत्त्वों के भौतिक और रासायनिक गुणों का गहन अध्ययन करके तत्त्वों के वर्गीकरण की एक नई प्रणाली विकसित की। तत्त्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमानों के क्रम में सजाकर उन्होंने देखा कि

(i) तत्त्वों के गुणों में क्रमिक परिवर्तन होता है,

(ii) तत्त्वों की एक निश्चित संख्या के बाद लगभग समान  गुणवाले तत्त्व पाए जाते हैं। .

अपने निष्कर्षों के आधार पर मेंडलीव ने एक नियम का प्रतिपादन किया जिसे मेंडलीव का आवर्त नियम कहते हैं। इस नियम के अनुसार, तत्त्वों के भौतिक व रासायनिक गुण उनके परमाणु द्रव्यमानों के आवर्तफलन होते हैं। दूसरे शब्दों में, यदि तत्त्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमानों के क्रम में सजाया जाए तो एक निश्चित संख्या के बाद समान गुणवाले तत्त्व पाए जाते हैं।

मेंडलीव की आवर्त सारणी की मुख्य विशेषताएँ

मेंडलीव की आवर्त सारणी का वर्णन करने में सारणी 5.3 का उपयोग किया गया है। .

  1. वर्ग और उपवर्ग (Groups and Subgroups)

आवर्त सारणी की उदग्र स्तंभों को वर्ग कहते हैं। इन्हें रोमन अंकों (I, II, III, …, VIII) द्वारा निरूपित किया गया है। प्रत्येक वर्ग को A और B, दो उपवर्गों में बाँटा गया है। वर्ग I से लेकर वर्ग VII तक A और B दोनों उपवर्ग एक ही वर्ग के अंतर्गत रखे गए हैं। किंतु वर्ग VIII में तीन-तीन तत्त्वों की तीन क्षैतिज कतारें हैं।

वर्ग 0 में सिर्फ एक उदग्र स्तंभ है जिसमें उत्कृष्ट गैसों (He, Ne, Ar, Kr, Xe और Rn) को रखा गया है।

कुछ ऐसे भी तत्त्व हैं जो रासायनिक दृष्टि से एक ही परिवार के सदस्य माने जाते हैं।.

  1. आवर्त (Periods) – आवर्त सारणी की क्षैतिज कतारें आवर्त कहलाती हैं। सारणी में 1 से लेकर 7 तक कुल सात आवर्त हैं। इन आवों में तत्त्वों का आवर्त

 

मेंडलीव की सारणी की उपयोगिताएँ

मेंडलीव की आवर्त सारणी की मुख्य उपयोगिताएँ निम्नलिखित हैं

  1. नियमित अध्ययन में सुविधा-इस सारणी की सहायता से तत्त्वों और उनके गुणों का अध्ययन करना काफी आसान हो गया है। किसी वर्ग के किसी विशिष्ट तत्त्व तथा उसके यौगिकों के गुणों की जानकारी हो जाने पर इस वर्ग के अन्य तत्त्वों और उनके यौगिकों के गुणों का काफी हद तक पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, वर्ग IA के सोडियम का अध्ययन कर लेने से ही उस वर्ग के अन्य तत्त्वों के गुणों की जानकारी हो जाती है। इसी प्रकार, वर्ग VIIA में क्लोरीन का अध्ययन कर लेने से उस वर्ग के अन्य तत्त्वों के गुणों का अंदाजा लगाया जा सकता है।
  2. नए तत्त्वों का पूर्वानुमान-मेंडलीव ने अपनी सारणी का निर्माण करते समय कुछ अज्ञात तत्त्वों के लिए सारणी में कुछ रिक्त स्थान छोड़ दिए थे। किंतु, उन्होंने यह स्पष्ट रूप से कहा कि आगे चलकर इन तत्त्वों का आविष्कार होने पर इन्हें इन रिक्त स्थानों में रखा जाएगा। साथ ही, उन्होंने उन तत्त्वों और उनके यागिकों के संभावित मुख्य गुणों की भविष्यवाणी भी कर दी।
  3.  परमाणु द्रव्यमान में सुधार—मेंडलीव के समय कुछ तत्त्वों के परमाणु द्रव्यमान गलत निकाले गए थे। किंतु मेंडलीव ने अपनी आवर्त सारणी में उनके अन्य गुणों को ध्यान में रखकर उन्हें उचित स्थान पर रखा। बाद में इसी आवर्त सारणी के आधार पर उन तत्त्वों के ठीक-ठीक परमाणु द्रव्यमान ज्ञात किए गए।उदाहरण के लिए, बेरिलियम (Be), इंडियम (In) और गोल्ड (Au)|

    किसी तत्त्व का परमाणु द्रव्यमान निम्नांकित सूत्र के द्वारा ज्ञात किया जाता है
    परमाणु द्रव्यमान = तुल्यांकी द्रव्यमान x संयोजकता।
    तत्त्व का तुल्यांकी द्रव्यमान प्रयोग द्वारा निर्धारित किया जाता है और तत्त्व की संयोजकता आवर्त सारणी में उसके स्थान से निश्चित की जाती है। उपर्युक्त सूत्र से तत्त्व का ठीक-ठीक परमाणु द्रव्यमान ज्ञात किया जा सकता है।
    बेरिलियम (Be) का तुल्यांकी द्रव्यमान प्रयोग द्वारा 4.5 पाया गया। Be के अधिकांश गुण ऐलुमिनियम (AI) के समान होने के कारण Be को भी Al की तरह त्रिबंधक माना गया था। इसके अनुसार इसका परमाणु द्रव्यमान = 4.5×3 = 13.5.

  4.  तत्त्वों की संयोजकता:- आवर्त सारणी के किसी वर्ग विशेष के सभी तत्त्वों की संयोजकता एक ही होती है, और किसी आवर्त में यह क्रमिक रूप से परिवर्तित होती है।

    (i) हाइड्रोजन के सापेक्ष संयोजकता–आवर्त सारणी के वर्गों में तत्त्वों की संयोजकता हाइड्रोजन के सापेक्ष 1 से 4 तक बढ़ती है, पुनः क्रमशः घटते हुए 4 से 1 हो जाती है। विभिन्न वर्गों के तत्त्वों के हाइड्राइड से इस बात की पुष्टि हो जाती है
    वर्ग I II III IV V VI VII
    संयोजकता 1 2 3 4 3 2 1
    आवर्त 3 के| हाइड्राइड्स NaH MgH_2 AlH_3 SiH_4 PH_3 H_2 S HCl

    (ii) ऑक्सीजन के सापेक्ष संयोजकता-आवर्त सारणी के जिस वर्ग में तत्त्व रहता है, ऑक्सीजन के सापेक्ष उसकी अधिकतम संयोजकता वर्ग की संख्या के बराबर होती है। आवर्त 3 के तत्त्वों की उच्चतम अवस्था वाले ऑक्साइडों से इस बात की पुष्टि हो जाती है।
    सारणी 5.8 .. वर्ग- I, II II Iv_v_vI VII अधिकतम 1 2 3 4 5 6 7 संयोजकता
    आवर्त 3 के Nano MgO AILO SiO, PMOF SOCIyo. तत्त्वों के उच्चतम
    ऑक्साइड्स
    5. अनुसंधान कार्य में सहायता-आवर्त सारणी में किसी तत्त्व-विशेष का स्थान देखकर निश्चित रूप से हम कह सकते हैं कि इस तत्त्व का अन्य तत्त्वों के साथ किस प्रकार का संबंध होगा।
    अतः, रसायनशास्त्र के क्षेत्र में अनुसंधान करनेवाले वैज्ञानिकों के लिए यह सारणी अत्यंत उपयोगी प्रमाणित हुई है।

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